जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट बहाली पर अमेरिकी राजनयिक ने जताई खुशी, कहा- नजरबंद नेता भी जल्द हों रिहा


News by Rajdhani Evening News // Published on :25 Jan,2020



नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीरमें इंटरनेट बहाली पर अमेरिकी राजनयिक ने जताई खुशी, कहा- नजरबंद नेता भी जल्द होंरिहा

नई दिल्ली।जम्मू-कश्मीर में करीब पांच महीने बाद इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई है। 2जी  मोबाइल इंटरनेट सेवाओं की बहाली के साथ ही कुछ पाबंदियांजरूर लगाई गई हैं। मसलन प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी के अनुसार, घाटी के लोग301 वेबसाइट्स ही एक्सेस कर सकेंगे। सोशल मीडिया साइट्स पर पाबंदी जारी रहेगी। जम्मू-कश्मीरमें इंटरनेट बहाली पर दक्षिण और केंद्रीय एशियाई मामलों की अमेरिका की वरिष्ठ राजनयिकएलिस वेल्स ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा, 'कश्मीर में इंटरनेट सेवा की आंशिकबहाली जैसे प्रगतिशील कदम से मैं खुश हूं। हम लगातार सरकार से अनुरोध करेंगे कि वोहमारे राजनयिकों को नियमित पहुंच की अनुमति दें और बिना किसी आरोप के हिरासत में लिएगए नेताओं को रिहा करने के लिए तेजी से कदम बढ़ाएं।'

एलिस वेल्सने आगे कहा, 'यात्राएं अक्सर ज्यादा सुनने और समझने का मौका देती हैं।खासतौर से भारतके नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर, इस मुद्दे पर देश जबरदस्त तरीके से लोकतांत्रिकसमीक्षा के दौर से गुजर रहा है, फिर चाहे वो विपक्ष के द्वारा सड़कों पर हो, मीडियामें हो या अदालत में।' वेल्स ने हाल ही में 15 देशों के राजनयिकों के जम्मू-कश्मीरदौरे को महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने घाटी में इंटरनेट बैन और नेताओं की हिरासत परचिंता व्यक्त की थी। दौरे को लेकर उन्होंने कहा था कि उन्हें यकीन है कि राजनयिकोंके कश्मीर दौरे के बाद घाटी के हालात सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

बताते चलेंकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में पाबंदियों और नेताओं की नजरबंदी कोलेकर दी गई याचिका पर सुनवाई की थी।कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक हफ्ते में सभी पाबंदियोंकी समीक्षा का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि कश्मीर ने बहुत हिंसा देखी है. इंटरनेटफ्रीडम ऑफ स्पीच के तहत आता है। यह आर्टिकल-19 के तहत आता है।इंटरनेट फ्रीडम ऑफ स्पीचका जरिया भी है।इसे बंद करना न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है। जम्मू-कश्मीर मेंसभी पाबंदियों पर एक हफ्ते के भीतर समीक्षा की जाए। फिलहाल के लिए जहां जरूरत हो वहांतत्काल प्रभाव से इंटरनेट सेवाएं शुरू की जाएं।

गौरतलब हैकि 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्र शासित राज्योंमें बांट दिया गया था। जम्मू-कश्मीर में तब से इंटरनेट सेवाएं बंद हैं. सिर्फ ब्रॉडबैंडसे ही संपर्क कायम है। सरकार ने लैंडलाइन फोन और पोस्टपेड मोबाइल सेवा भी हाल में हीशुरू की है। विपक्षी दल जम्मू-कश्मीर के हालातों को लेकर मोदी सरकार पर हमलावर हैं।पाकिस्तान भी इस मुद्दे को लेकर विदेशी मंच पर भारत को घेरने की कोशिश करता आ रहा है।हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के मुनीर अकरम ने घाटी केहालातों को लेकर भारत पर कई आरोप लगाए। जिसके बाद यूएन में भारत के प्रतिनिधि सैयदअकबरुद्दीन ने उन्हें करारा जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ झूठ फैलानाबंद कर देना चाहिए। वह भारत के खिलाफ झूठी कहानियां गढ़ता है। ऐसा कर वह अपनी परेशानीको छुपाने की कोशिश करता है। आज पाकिस्तान बुराई का प्रतीक बन चुका है।