बातचीत से कश्मीरी नेताओ को साधेगी केंद्र की मोदी सरकार


News by Rajdhani Evening News // Published on :12 Jun,2021



जम्मू:

बातचीत से कश्मीरी नेताओ को साधेगी केंद्र की मोदी सरकार

जम्मू। जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा निरस्त किये वराज्य को दो हिस्सों में विभाजित कर केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने के बाद अब पुनःकेंद्र सरकार द्वारा "कुछ बड़ा" किये जाने की फैली अफवाहों पर विराम लगानेकी कवायद के तहत  जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपालमनोज

सिन्हा साफ़ किया हैं कि न तो जम्मू-कश्मीर का विभाजन होने जारहा है और न ही ऐसा कुछ बड़ा होने जा रहा है, जिसके लिए यहां अतिरिक्त सुरक्षाबलोंकी तैनाती की जरूरत है। यह सिर्फ शरारती तत्वों द्वारा अपने नीहित स्वार्थ के लिए लोगोंमें डर व असमंजस पैदा करने के लिए फैलाई जा रही अफवाह से ज्यादा कुछ नहीं है। इसकेसाथ ही उन्होंने कहा कि यहां परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होते ही विधानसभा चुनाव होंगे।लेकिन कहावत हैं कि "दूध का जला लस्सी भी फूंककर पीता हैं" ऐसा इसलिए भीक्योंकि पूर्ववर्ती राज्य के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी 5 अगस्त 2019 से पूर्व विश्वासदिलाया था कि कुछ बड़ा नहीं होने जा रहा लेकिन उसके बाद की स्थिति से सब वाफिक हैं।लेकिन वर्तमान में जारी कवायद प्रदेश के असंतुष्ट नेताओ सहित पीपुल्स अलायंस फॉर गुप्करडिक्लेरेशन (पीएजीडी) के असंतुष्ट राजनीतिक दलों को साधने का प्रयास कर रही है। इसकवायद में सत्तारूढ़ भाजपा का शीर्ष नेतृत्व "आने वाले हफ्तों में" इन राजनीतिकदलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करने का भी प्रयास कर रहा है। यह पहल अगस्त2019 में जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा निरस्त करने के बाद राजनीतिक दलों में बने मौनकी जमी बर्फ पिघलाने के लिए मोदी सरकार द्वारा उठाया जाने वाला पहला बड़ा कदम प्रतीतहो रहा है। मोदी सरकार ने इसके लिए आपने शीर्ष स्रोतों को बैकचैनल्स पर बातचीत के लिएगुप्त रूप से सक्रीय कर दिया हैं। “केंद्र द्वारा कई शीर्ष संपर्क सूत्र पिछले कई हफ्तोंसे जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं। इसमेंप्रदेश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) भी शामिल है, जिसकेअध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला गुप्कर गठबंधन के भी प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त मोदी सरकारके नजदीकी माने जाने वाले पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन और जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टीके अल्ताफ बुखारी को भी "कश्मीर में अपनी-अपनी पैठ बढ़ाने के लिए आगे करने की योजनापर काम चल रहा है।" माना जा रहा हैं कि यदि सब कुछ ठीक रहा, तो जम्मू-कश्मीर केनेताओं के नई दिल्ली जाने और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक करने की संभावना है।सूत्र बताते हैं कि इस शीर्ष बातचीत में केंद्र शासित प्रदेश बनाये गए जम्मू-कश्मीरको पुनः राज्य का दर्जा देने और जल्द विधानसभा चुनाव कराये जाने पर सहमति का प्रयासकिया जाएगा। प्रदेश की फिजाओं में तैर रही विभिन्न अफवाहों के बीच मोदी सरकार द्वारापीएजीडी सहित अन्य नेताओ से बातचीत की कवायद को दवाब बनाकर अपनी बाते मनवाने के रूपमें देखा जा सकता हैं। क्योंकि एक ओर केंद्र की मोदी सरकार प्रदेश के राजनेताओ को साधनेके लिए अथक प्रयासों में जुटी हैं तो दूसरी ओर प्रदेश भाजपा के नेता अप्रत्यक्ष रूपसे ऐसे संगठनों को समर्थन दे रहे हैं जो जम्मू संभाग को अलग राज्य बनाने की मांग उठारहे हैं। इसी मांग को हवा देने के लिए भाजपा की पुरानी साथी रही बाला साहेब ठाकरे कीपार्टी शिव सेना भी मैदान में कूद पड़ी हैं। अब ऐसी मांग से प्रदेश के स्थानीय राजनीतिकदलों पर कितना प्रभाव पड़ेगा वह एक अलग विषय हैं। लेकिन इस तमाम कवायद से संकेत मिलरहे हैं कि केंद्र की मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल कर आगामी अक्टूबर-नवंबरतक राज्य में विधानसभा चुनाव करवा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा संदेश देने की तैयारीमें हैं। जहां तक जम्मू संभाग को अलग राज्य या फिर कश्मीर के जम्मू संभाग से लगते इलाकोको जोड़कर एक तीसरा संभाग बनाने की आशंकाए जताई जा रही हैं वह होना संभव नहीं हैं। इसकीसबसे बड़ी वजह राज्य का मुस्लिम बहुल होना हैं। क्योंकि जम्मू को अलग राज्य बनाने कीमांग करने वाले तमामं हिंदूवादी संगठन हिंदू बहुलता वाला प्रदेश बनाये जाने की जो बातकर रहे हैं उसके आकर लेने से वह मात्र चार जिलों तक सिमटकर रह सकता हैं। वहीँ ऐसा करनेसे मुस्लिम बहुल जिलों के बीच खाई को और अधिक गहरी होगी जो समग्र जम्मू-कश्मीर के हीनहीं बल्कि समूचे देश के लिए अहितकारी कदम साबित होगा।